खाँसी (Cough)
खाँसी शरीर का साँस की नली साफ़ करने का तरीका है। ज़्यादातर खाँसी सर्दी-ज़ुकाम के बाद 2–3 हफ्ते में अपने-आप ठीक हो जाती है। 2 हफ्ते से ज़्यादा खाँसी हो तो टीबी की मुफ्त जाँच ज़रूर कराएँ।
- ज़्यादातर कारण
- सर्दी-ज़ुकाम का वायरस
- सामान्य अवधि
- 3 हफ्ते तक
- 2 हफ्ते से ज़्यादा
- टीबी की मुफ्त जाँच
- Antibiotic
- ज़्यादातर खाँसी में ज़रूरत नहीं
खाँसी के प्रकार
| अवधि | आमतौर पर कारण |
|---|---|
| 3 हफ्ते से कम | सर्दी-ज़ुकाम, flu, गले का संक्रमण |
| 3–8 हफ्ते | वायरल के बाद की खाँसी, बलगम का गले में गिरना |
| 8 हफ्ते से ज़्यादा (बच्चों में 4 हफ्ते) | दमा, एसिडिटी, धूम्रपान, एलर्जी, टीबी, फेफड़ों की दूसरी बीमारी |
| सूखी खाँसी | बलगम वाली खाँसी | |
|---|---|---|
| कैसी | गले में खराश जैसी, बलगम नहीं | बलगम निकलता है |
| आम कारण | वायरल, एलर्जी, दमा, एसिडिटी, कुछ BP दवाएँ | सर्दी, बैक्टीरिया का संक्रमण, निमोनिया, टीबी, धूम्रपान |
खाँसी के कारण
- सर्दी-ज़ुकाम, flu और वायरल संक्रमण
- नाक का बलगम गले में गिरना (post-nasal drip), एलर्जी
- दमा
- एसिडिटी, खासकर रात की खाँसी
- धूम्रपान, चूल्हे का धुआँ, प्रदूषण, धूल
- टीबी
- निमोनिया
- COPD (धूम्रपान करने वालों में लंबी खाँसी और साँस फूलना)
- कुछ BP की दवाएँ (जैसे enalapril, ramipril) से सूखी खाँसी
- बच्चों में काली खाँसी (whooping cough) या गले में कुछ अटकना
- दिल की कमज़ोरी, फेफड़ों का कैंसर (कम, पर लंबी खाँसी में जाँच ज़रूरी)
साथ के लक्षण क्या बताते हैं
| साथ में | क्या हो सकता है |
|---|---|
| नाक बहना, छींक, हल्का बुखार | सर्दी-ज़ुकाम |
| साँस में सीटी, रात में बढ़ना | दमा |
| सीने में जलन, खट्टी डकार, लेटने पर बढ़ना | एसिडिटी |
| शाम को बुखार, रात में पसीना, वज़न घटना | टीबी |
| तेज़ बुखार, तेज़ साँस, सीने में दर्द | निमोनिया |
| बच्चे में खाँसी के दौरे, फिर "हूप" की आवाज़ या उल्टी | काली खाँसी |
खतरे के संकेत (Warning signs)
इनमें से कोई भी संकेत दिखे तो तुरंत hospital जाएँ:
- खाँसी में खून
- साँस फूलना, तेज़ साँस या साँस में सीटी
- सीने में दर्द
- होंठ या नाखून नीले पड़ना
- तेज़ बुखार जो कम न हो
- बच्चे के गले में कुछ अटकने के बाद अचानक खाँसी या साँस में आवाज़
- बच्चे में खाँसी के दौरे के बाद नीला पड़ना या साँस रुकना
- रात में भौंकने जैसी खाँसी और साँस लेते समय सीटी की आवाज़ (croup)
- 3 महीने से छोटे बच्चे को खाँसी
जाँच कब ज़रूरी है?
- सर्दी वाली खाँसी में आमतौर पर किसी जाँच की ज़रूरत नहीं होती।
- 2 हफ्ते से ज़्यादा खाँसी: बलगम की NAAT जाँच (टीबी के लिए) सरकारी केंद्रों पर मुफ्त।
- छाती का X-ray: लंबी खाँसी, धूम्रपान करने वाले, खून आए या निमोनिया का शक।
- Spirometry: दमा या COPD का शक।
- SpO2: साँस फूलने पर।
इलाज और घर पर देखभाल
- गुनगुना पानी, सूप और गरम तरल पिएँ।
- शहद खाँसी में आराम देता है (1 साल से बड़े बच्चों और बड़ों में)।
- भाप लें, नमक वाले गुनगुने पानी से गरारे करें।
- धुएँ, धूल और ठंडी हवा से बचें।
- खाँसी के सिरप का फ़ायदा सीमित है। सिरप डॉक्टर की सलाह से ही लें, और ज़्यादा मात्रा या लंबे समय तक नहीं।
- Antibiotic तभी काम करती है जब बैक्टीरिया का संक्रमण हो, यह डॉक्टर तय करते हैं।
- लंबी खाँसी में कारण का इलाज ज़रूरी है: दमा में inhaler, एसिडिटी में दवा, BP दवा से खाँसी हो तो डॉक्टर दवा बदल सकते हैं।
धूम्रपान और चूल्हे का धुआँ
- बीड़ी-सिगरेट से लगातार खाँसी (smoker's cough) फेफड़ों की स्थायी बीमारी (COPD) की शुरुआत हो सकती है।
- लकड़ी-उपले के चूल्हे का धुआँ महिलाओं और बच्चों में खाँसी और फेफड़ों की बीमारी का बड़ा कारण है। LPG इस्तेमाल करें, रसोई में हवा आने दें।
- धूम्रपान छोड़ने के कुछ हफ्तों में खाँसी कम होने लगती है।
बच्चों में खाँसी
- 4 साल से छोटे बच्चों को खाँसी-ज़ुकाम का सिरप डॉक्टर की सलाह के बिना न दें।
- 1 साल से छोटे बच्चे को शहद न दें।
- काली खाँसी: खाँसी के लंबे दौरे, फिर साँस खींचते समय "हूप" की आवाज़ या उल्टी। छोटे बच्चों के लिए खतरनाक। DPT/pentavalent का टीका इससे बचाता है।
- छोटी चीज़ें (मूंगफली, सिक्के, खिलौने के टुकड़े) बच्चों से दूर रखें।
- तेज़ साँस या पसलियाँ धँसें तो निमोनिया हो सकता है।
बुज़ुर्गों में खाँसी
- लंबी खाँसी और साँस फूलना COPD या दिल की कमज़ोरी का संकेत हो सकता है।
- खाना-पानी निगलते समय खाँसी आना निगलने की कमज़ोरी का संकेत है, इससे निमोनिया हो सकता है।
- BP की दवा शुरू करने के बाद नई सूखी खाँसी हो तो डॉक्टर को बताएँ।
कब डॉक्टर या hospital जाएँ?
- ऊपर दिया कोई भी खतरे का संकेत: तुरंत
- खाँसी 2 हफ्ते से ज़्यादा
- खाँसी के साथ वज़न घटना या रात में पसीना
- बार-बार खाँसी, हर सर्दी में साँस फूलना
- धूम्रपान करते हों और खाँसी का तरीका बदल जाए
कौन-सा doctor दिखाएँ?
- General Physician / PHC: शुरुआती जाँच, टीबी जाँच
- Pulmonologist / Chest Physician: लंबी खाँसी, दमा, COPD
- ENT: नाक-गले की तकलीफ़, post-nasal drip
- Pediatrician: बच्चों के लिए
क्या न करें?
- हर खाँसी में अपने मन से antibiotic न लें।
- Codeine वाले खाँसी के सिरप न लें, इनकी लत लग सकती है।
- छोटे बच्चों को डॉक्टर की सलाह के बिना सिरप न दें।
- एक साथ कई सिरप न लें।
- 2 हफ्ते से ज़्यादा खाँसी को नज़रअंदाज़ न करें।
- धूम्रपान न करें।
बचाव कैसे करें?
- धूम्रपान छोड़ें, घर में धुआँ न होने दें।
- प्रदूषण में mask पहनें।
- साबुन से हाथ धोएँ, खाँसते समय मुँह ढकें।
- बच्चों का पूरा टीकाकरण (DPT, PCV, खसरा) कराएँ।
- बुज़ुर्ग और पुरानी बीमारी वाले flu के टीके के बारे में डॉक्टर से पूछें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
वायरल के बाद खाँसी कितने दिन रहती है?
सर्दी-ज़ुकाम के बाद खाँसी 2–3 हफ्ते तक रह सकती है। इससे ज़्यादा हो तो डॉक्टर को दिखाएँ।
क्या 2 हफ्ते की हर खाँसी टीबी होती है?
नहीं, पर टीबी की जाँच ज़रूर करानी चाहिए। यह सरकारी केंद्रों पर मुफ्त है।
क्या BP की दवा से खाँसी हो सकती है?
हाँ, कुछ BP दवाएँ सूखी खाँसी करती हैं। डॉक्टर को बताएँ, वे दवा बदल सकते हैं। खुद से दवा बंद न करें।
क्या शहद खाँसी में फ़ायदेमंद है?
हाँ, 1 साल से बड़े बच्चों और बड़ों में शहद खाँसी में आराम देता है।
रात में खाँसी क्यों बढ़ती है?
लेटने पर बलगम गले में गिरता है और एसिडिटी बढ़ती है। दमा भी रात में बढ़ता है। लंबे समय तक रहे तो जाँच कराएँ।