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किडनी की बीमारी (CKD)
किडनी का धीरे-धीरे, महीनों-सालों में कमज़ोर होना। शुरुआत में कोई लक्षण नहीं होता, इसलिए डायबिटीज़ और BP वाले लोगों को हर साल किडनी की जाँच ज़रूर करानी चाहिए। जल्दी पकड़ने पर बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।
- सबसे बड़े कारण
- डायबिटीज़ और हाई BP
- शुरुआत में
- कोई लक्षण नहीं
- मुख्य जाँच
- Creatinine (eGFR), urine albumin
- मुफ्त dialysis
- ज़िला अस्पतालों में (PM National Dialysis Programme)
किडनी की बीमारी क्या है?
किडनी खून साफ़ करके गंदगी और ज़्यादा पानी पेशाब के रूप में निकालती है, BP नियंत्रित करती है और खून व हड्डियों के लिए ज़रूरी हार्मोन बनाती है। जब किडनी 3 महीने से ज़्यादा समय तक ठीक से काम न करे, तो इसे CKD (Chronic Kidney Disease) कहते हैं।
| Stage | eGFR | मतलब |
|---|---|---|
| 1 | 90 या ज़्यादा (साथ में पेशाब में protein आदि) | किडनी में नुकसान, काम सामान्य |
| 2 | 60–89 | हल्की कमी |
| 3 | 30–59 | मध्यम कमी |
| 4 | 15–29 | गंभीर कमी, dialysis की तैयारी |
| 5 | 15 से कम | किडनी फेल, dialysis या transplant |
कारण और किसे खतरा
लक्षण
- शुरुआत में कोई लक्षण नहीं
- पैरों, टखनों, आँखों के नीचे या चेहरे पर सूजन
- थकान, कमज़ोरी, खून की कमी
- झागदार पेशाब, रात में बार-बार पेशाब, या पेशाब कम होना
- भूख न लगना, जी मिचलाना, मुँह का स्वाद खराब
- पूरे शरीर में खुजली
- साँस फूलना
- BP बढ़ना या नियंत्रित न होना
- मांसपेशियों में ऐंठन
जब तक लक्षण दिखते हैं, तब तक किडनी काफ़ी कमज़ोर हो चुकी होती है। इसलिए डायबिटीज़, BP, 60 से ज़्यादा उम्र या परिवार में किडनी की बीमारी हो तो हर साल जाँच कराएँ।
खतरे के संकेत (Warning signs)
इनमें से कोई भी हो तो तुरंत hospital जाएँ:
- पेशाब बहुत कम या बिल्कुल न आना
- लेटने पर साँस फूलना, बैठकर ही साँस ले पाना
- भ्रम, बहुत नींद आना या झटके
- बार-बार उल्टी, कुछ भी न खा-पी पाना
- सीने में दर्द, धड़कन बहुत अनियमित
- बहुत ज़्यादा कमज़ोरी, हाथ-पैर में लकवे जैसा लगना (potassium बढ़ना)
- पूरे शरीर में तेज़ी से बढ़ती सूजन
जाँच
| जाँच | क्या बताती है |
|---|---|
| Serum creatinine → eGFR | किडनी कितने प्रतिशत काम कर रही है |
| Urine albumin (ACR / microalbumin) | पेशाब में protein, किडनी के नुकसान का शुरुआती संकेत |
| Urine routine | protein, खून, संक्रमण |
| किडनी का Ultrasound | आकार, पथरी, रुकावट, गाँठें |
| Hemoglobin, potassium, calcium, phosphorus | बीमारी का असर |
Creatinine "normal range" में होने पर भी किडनी कमज़ोर हो सकती है, खासकर बुज़ुर्गों और दुबले लोगों में। इसलिए eGFR और urine albumin दोनों देखें।
इलाज
- शुगर और BP अच्छी तरह नियंत्रित रखें, यही सबसे बड़ा इलाज है।
- कुछ BP और डायबिटीज़ की दवाएँ किडनी को बचाने में भी मदद करती हैं। Nephrologist तय करेंगे।
- किडनी को नुकसान पहुँचाने वाली दवाएँ (दर्द की दवाएँ आदि) बंद करना।
- खून की कमी, हड्डियों और potassium का इलाज।
- Dialysis: Stage 5 में मशीन से खून साफ़ करना (hemodialysis, हफ्ते में 2–3 बार) या पेट के रास्ते घर पर (peritoneal dialysis)।
- PM National Dialysis Programme में ज़िला अस्पतालों में गरीब मरीज़ों के लिए मुफ्त dialysis।
- Kidney transplant: सबसे अच्छा लंबे समय का इलाज, परिवार के स्वस्थ सदस्य दान कर सकते हैं।
खान-पान
- नमक कम करें: अचार, पापड़, नमकीन, पैकेट वाला खाना बंद।
- Protein न बहुत ज़्यादा, न बहुत कम। Protein powder न लें।
- Potassium (केला, नारियल पानी, आलू, टमाटर) और phosphorus पर पाबंदी सिर्फ तब जब डॉक्टर कहें, क्योंकि यह stage और रिपोर्ट पर निर्भर है।
- पानी कितना पिएँ, यह भी stage पर निर्भर है। Dialysis वाले मरीज़ों में पानी सीमित होता है, डॉक्टर से पूछें।
- किडनी के मरीज़ों के लिए dietitian से खाने की योजना बनवाएँ।
बच्चों में
- बच्चों में किडनी की बीमारी जन्मजात बनावट, बार-बार पेशाब के संक्रमण या किडनी की सूजन से हो सकती है।
- बच्चे के चेहरे पर सूजन, झागदार या लाल पेशाब, कम पेशाब हो तो Pediatrician को दिखाएँ।
- बच्चों में पेशाब का संक्रमण बार-बार हो तो जाँच ज़रूर कराएँ।
बुज़ुर्गों में
- उम्र के साथ किडनी कमज़ोर होती है, और डायबिटीज़-BP से तेज़ी से।
- कई दवाओं की मात्रा किडनी के हिसाब से बदलनी पड़ती है। हर डॉक्टर को किडनी की रिपोर्ट दिखाएँ।
- दस्त, उल्टी या कम पानी पीने से किडनी अचानक और कमज़ोर हो सकती है।
कब डॉक्टर को दिखाएँ?
- ऊपर दिया कोई भी खतरे का संकेत: तुरंत
- डायबिटीज़ या BP हो तो हर साल creatinine और urine albumin
- पैरों-चेहरे पर सूजन या झागदार पेशाब
- eGFR 60 से कम आए
कौन-सा doctor दिखाएँ?
- Nephrologist (किडनी विशेषज्ञ): मुख्य डॉक्टर
- General Physician / MD Medicine: शुगर-BP का इलाज और शुरुआती जाँच
- Urologist: पथरी, प्रोस्टेट, रुकावट
- Dietitian: खाने की योजना
क्या न करें?
- दर्द की दवाएँ (ibuprofen, diclofenac आदि) अपने मन से न लें।
- भारी धातु वाली देसी दवाएँ, भस्म या बिना जाँची जड़ी-बूटियाँ न लें।
- Protein powder या bodybuilding supplement न लें।
- CT scan में dye लगवाने से पहले डॉक्टर को किडनी की बीमारी के बारे में बताएँ।
- BP या शुगर की दवा बंद न करें।
- "Dialysis की ज़रूरत नहीं, हमारी दवा से किडनी ठीक" जैसे दावों के भरोसे इलाज न छोड़ें।
किडनी को कैसे बचाएँ
- शुगर और BP नियंत्रित रखें।
- हर साल किडनी की जाँच (डायबिटीज़, BP, 60+)।
- नमक कम, वज़न सही, धूम्रपान बंद।
- दर्द की दवाओं से बचें।
- पथरी और पेशाब के संक्रमण का समय पर इलाज।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Creatinine normal है तो क्या किडनी ठीक है?
ज़रूरी नहीं। शुरुआत में creatinine सामान्य रह सकता है। eGFR और पेशाब में albumin की जाँच भी ज़रूरी है।
क्या किडनी की बीमारी ठीक हो सकती है?
CKD आमतौर पर पूरी तरह ठीक नहीं होती, पर सही इलाज से इसका बढ़ना बहुत धीमा किया जा सकता है।
किडनी के मरीज़ को कितना पानी पीना चाहिए?
यह stage पर निर्भर है। ज़्यादा पानी पीने से कमज़ोर किडनी ठीक नहीं होती। डॉक्टर से पूछें।
क्या एक किडनी से जी सकते हैं?
हाँ। किडनी दान करने वाले लोग एक किडनी से सामान्य जीवन जीते हैं।
Dialysis शुरू हो जाए तो क्या हमेशा करना पड़ता है?
किडनी फेल (stage 5) में transplant न हो तो dialysis लगातार करना पड़ता है। अचानक किडनी खराब होने में कभी-कभी कुछ समय बाद dialysis बंद हो जाता है।