नींद न आना (Insomnia)
नींद आने में देर लगना, बार-बार नींद टूटना या बहुत जल्दी उठ जाना और फिर भी थकान रहना। ज़्यादातर मामलों में सोने की आदतें बदलने से नींद सुधर जाती है, बिना गोली के।
- बड़ों को ज़रूरी नींद
- 7–9 घंटे
- सबसे असरदार इलाज
- नींद की आदतें बदलना
- नींद की गोली
- सिर्फ कुछ दिन, डॉक्टर की सलाह से
- ज़ोर के खर्राटे
- Sleep apnea की जाँच
नींद न आना क्या है?
कभी-कभार तनाव में नींद न आना सामान्य है। लेकिन जब हफ्ते में 3 या ज़्यादा रात नींद में दिक्कत हो और दिन में थकान, चिड़चिड़ापन या ध्यान न लगने जैसी समस्या हो, तो इसे insomnia कहते हैं। 3 महीने से ज़्यादा रहे तो लंबे समय का insomnia माना जाता है।
| उम्र | ज़रूरी नींद (लगभग) |
|---|---|
| स्कूल जाने वाले बच्चे | 9–12 घंटे |
| किशोर | 8–10 घंटे |
| बड़े | 7–9 घंटे |
| बुज़ुर्ग | 7–8 घंटे |
कारण
- तनाव, चिंता, डिप्रेशन
- सोने-उठने का समय रोज़ बदलना, रात की shift
- रात में mobile, TV और screen
- शाम को चाय-कॉफ़ी, शराब, तंबाकू
- देर रात भारी खाना
- शोर, रोशनी, गर्मी
- दर्द, खाँसी, एसिडिटी
- रात में बार-बार पेशाब (prostate, डायबिटीज़)
- Sleep apnea (नींद में साँस रुकना)
- पैरों में बेचैनी (restless legs)
- थायराइड, कुछ दवाएँ (steroid आदि), माहवारी बंद होने पर गर्मी लगना
लक्षण और Sleep Apnea
- बिस्तर पर लेटने के बाद देर तक नींद न आना
- रात में बार-बार नींद टूटना
- बहुत जल्दी आँख खुल जाना और फिर नींद न आना
- सुबह तरोताज़ा महसूस न करना
- दिन में थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान न लगना
Sleep apnea के संकेत
- बहुत ज़ोर के खर्राटे
- नींद में साँस रुकना, फिर हाँफकर जागना (घरवाले बता सकते हैं)
- पूरी रात सोने के बाद भी दिन में बहुत नींद आना
- सुबह सिरदर्द
- अक्सर मोटापा और हाई BP के साथ
Sleep apnea से BP, दिल की बीमारी और लकवे का खतरा बढ़ता है, और दिन में नींद आने से दुर्घटना हो सकती है। इसकी जाँच और इलाज ज़रूरी है।
इन हालात में जल्दी डॉक्टर से मिलें
- गाड़ी चलाते या काम करते समय नींद के झोंके आना
- नींद में साँस रुकते देखा गया हो
- नींद न आने के साथ बहुत उदासी, निराशा या खुद को नुकसान पहुँचाने के ख्याल (तुरंत Tele-MANAS 14416)
- कई दिनों तक बिल्कुल न सोना, फिर भी बहुत ज़्यादा ऊर्जा, तेज़ बातें और बड़े-बड़े प्लान
- अचानक नींद गायब होने के साथ भ्रम
- लेटने पर साँस फूलना या सीने में दर्द
जाँच
- 1–2 हफ्ते की नींद की डायरी: कब सोए, कब उठे, कितनी बार जागे, चाय-कॉफ़ी, दिन की झपकी।
- Sleep apnea का शक हो तो sleep study (रात भर नींद की जाँच)।
- थायराइड, शुगर, खून की कमी की जाँच, ज़रूरत हो तो।
इलाज
- नींद की आदतें बदलना सबसे पहला और असरदार इलाज है (नीचे देखें)।
- CBT-I: नींद के लिए खास counselling, जो लंबे समय के insomnia में गोलियों से ज़्यादा असरदार है।
- नींद की गोली सिर्फ कुछ दिनों के लिए, डॉक्टर की सलाह से। लंबे समय तक लेने से आदत लगती है, अगले दिन सुस्ती रहती है और बुज़ुर्गों में गिरने का खतरा बढ़ता है।
- कारण का इलाज: डिप्रेशन, चिंता, दर्द, एसिडिटी, prostate, थायराइड।
- Sleep apnea में वज़न कम करना और CPAP मशीन (रात में मास्क से हवा) बहुत असरदार है।
अच्छी नींद की आदतें
- हर दिन एक ही समय पर उठें, छुट्टी के दिन भी।
- बिस्तर सिर्फ सोने के लिए रखें, उस पर mobile, TV या काम न करें।
- सोने से 1 घंटा पहले mobile और TV बंद करें।
- चाय-कॉफ़ी दोपहर के बाद न लें। शराब और तंबाकू से नींद खराब होती है।
- रात का खाना सोने से 2–3 घंटे पहले, हल्का।
- कमरा अंधेरा, शांत और ठंडा रखें।
- दिन में कसरत करें, पर सोने से ठीक पहले नहीं।
- दिन की झपकी 20–30 मिनट से ज़्यादा न हो, और दोपहर 3 बजे के बाद नहीं।
- 20 मिनट में नींद न आए तो उठ जाएँ, हल्की रोशनी में कुछ शांत काम करें (किताब पढ़ना), नींद आने पर फिर लेटें।
- बार-बार घड़ी न देखें।
- सोने से पहले धीमी गहरी साँस, हल्का संगीत या प्रार्थना से मन शांत करें।
महिलाओं में
- गर्भावस्था में, खासकर आखिरी महीनों में, नींद में दिक्कत आम है। करवट (बाईं तरफ़) से सोना और तकिए का सहारा मदद करता है।
- माहवारी बंद होने के समय रात में गर्मी लगना और पसीना नींद तोड़ता है। डॉक्टर से बात करें।
- गर्भावस्था में नींद की कोई भी दवा डॉक्टर से पूछकर लें।
बच्चों और किशोरों में
- सोने और उठने का तय समय रखें।
- सोने से पहले mobile, games और TV बंद करें। कमरे में screen न रखें।
- बच्चे के ज़ोर के खर्राटे और नींद में साँस रुकना बढ़े हुए टॉन्सिल-एडेनॉइड से हो सकता है। डॉक्टर को दिखाएँ।
- बच्चों को नींद की दवा न दें, और खाँसी का सिरप नींद के लिए न दें।
बुज़ुर्गों में
- उम्र के साथ नींद हल्की होना और जल्दी आँख खुलना कुछ हद तक सामान्य है।
- दिन में धूप, चलना-फिरना और लोगों से मिलना रात की नींद सुधारता है।
- नींद की गोलियाँ बुज़ुर्गों में गिरने, भ्रम और भूलने का खतरा बढ़ाती हैं। बिना डॉक्टर के न लें।
- रात में बार-बार पेशाब के लिए उठना हो तो prostate या शुगर की जाँच कराएँ, और शाम के बाद ज़्यादा पानी न पिएँ।
कब डॉक्टर को दिखाएँ?
- ऊपर दिए हालात में जल्दी
- 3–4 हफ्ते आदतें बदलने के बाद भी नींद न सुधरे
- ज़ोर के खर्राटे और दिन में नींद
- नींद न आने से काम या रिश्तों पर असर
- नींद की गोली के बिना नींद न आती हो
कौन-सा doctor दिखाएँ?
- General Physician: शुरुआती जाँच
- Psychiatrist: लंबे समय का insomnia, चिंता, डिप्रेशन
- Sleep specialist / Pulmonologist: sleep apnea
- ENT: खर्राटे, बच्चों में टॉन्सिल
क्या न करें?
- दवा दुकान से अपने मन से नींद की गोली (जैसे alprazolam) न लें।
- नींद के लिए शराब न पिएँ, इससे नींद और खराब होती है।
- खाँसी का सिरप नींद के लिए न लें।
- दिन में लंबी झपकी न लें।
- बिस्तर पर लेटकर mobile न चलाएँ।
- ज़ोर के खर्राटों को नज़रअंदाज़ न करें।
अच्छी नींद के लिए
- सोने-उठने का तय समय।
- रोज़ कसरत और धूप।
- शाम के बाद चाय-कॉफ़ी नहीं।
- सोने से पहले screen नहीं।
- तनाव के लिए योग, प्राणायाम या किसी से बात करना।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
कितने घंटे की नींद ज़रूरी है?
ज़्यादातर बड़ों को 7–9 घंटे की नींद चाहिए। बुज़ुर्गों को थोड़ी कम, बच्चों और किशोरों को ज़्यादा।
क्या नींद की गोली सुरक्षित है?
डॉक्टर की सलाह से कुछ दिनों के लिए। लंबे समय तक लेने से आदत लगती है और बुज़ुर्गों में गिरने का खतरा बढ़ता है।
क्या शराब पीने से नींद अच्छी आती है?
नहीं। शराब से जल्दी नींद आ सकती है, पर रात में बार-बार नींद टूटती है और नींद गहरी नहीं होती।
क्या खर्राटे लेना सामान्य है?
हल्के खर्राटे आम हैं। ज़ोर के खर्राटे, साँस रुकना और दिन में नींद sleep apnea के संकेत हैं, जाँच कराएँ।
क्या रात को दूध पीने से नींद आती है?
गुनगुना दूध कई लोगों को आराम देता है। यह नुकसानदेह नहीं, पर नींद की आदतें ज़्यादा ज़रूरी हैं।